Wednesday, August 27, 2008

जन्मदिन मुबारक हो ,अमृता जी



अमृता जी! जन्म दिन मुबारक हो, आप जहां भी होंगी, तारों की छांव में, बादलों की छांव में ,सब कुछ देख रही होंगी, आपको मेरी और आपके सभी चाहने वालों की ओर से जन्म दिन मुबारक।

आज मुझे वह दिन भी याद आ गया जब मैं अमृता से मिलने उनके निवास हौसखास गई थी। उस दिन वे बहुत बीमार थी या यूं कहिए कि वे बीमार ही चल रही थी उन दिनों, ज्यादा बोल नहीं पा रही थी लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे कुछ पल दिये, वो कुछ पल मेरे लिये सदैव अनमोल रहेंगे। यह मुलाकात मैं अकेले नहीं करना चाहती थी , लेकिन जब मिलने की घड़ी आयी तो मैं अकेले ही गई। मैंने इमरोज और अमृता दोनों से बातें की, यूं समझ लें कि उन पलों में हर बात जानने के लिये जल्दबाजी महसूस हो रही थी। उनके लेखन के बारे में , उनके और इमरोज के साथ साथ जीवन गुजारने के बारे में , उनके परिवार के बारे में, दुनिया की सोच के बारे में। सभी बातें हुई भी। उन्होंने औरत, प्यार, संबध और समाज सभी पर खुल कर कहा, उनके इस कहने में इमरोज ने काफी मदद की क्योंकि वे बोल नहीं पा रही थी। वैसे भी अमृता का जिक्र हो, इमरोज का न हो, ये कैसे हो सकता है?
वो सब मैंने सखी के अप्रैल २००३ के अंक में एक आर्टीकल "अपनी बात" में समेटा। सखी जागरण ग्रुप की महिला मैगजीन है। उस समय मैं जागरण ग्रुप के साथ ही जुड़ी थी। इसे आप भी पढ़ सकते हैं।

सालों बाद ,अभी पिछले सप्ताह फिर मेरी मुलाकात इमरोज से हुई, बहुत सी बातें हुई उनसे। मेरा फोकस था कि वे अमृता के बगैर कैसे समय बिता रहे हैं, उन्होंने मेरे इस जुमले पर एतराज किया, कहा, अमृता को पास्ट टेंस में मत कहो, वो मेरे साथ ही है, उसने जिस्म छोड़ा है, साथ नहीं। मैं कहीं भीतर तक उनकी इस बात से अभिभूत हो गई। फिर मन में ख्याल आया, अरे मैं तो आज भी अकेली ही आयी हूं। बेइंतहा मोहब्बत की कहानी को जान कर उनके सच्चे किरदारों को मिल कर ´कुछ` याद आ जाना लाजमी है। आज कहां है ऐसे प्यार करने वाले????

बहुत बातें हुई, बहुत देर बातें हुई, वो मैं अगली पोस्ट में लिखूंगी।
एक बात और .... इस ब्लॉग की शुरुआत शायद इसी पोस्ट के साथ होनी थी ....ये इस ब्लॉग पर पहली पोस्ट है ....कुछ खास हस्तियां....इस ब्लॉग में पहला कदम अमृता का....... आपको कैसा लगा ?







6 comments:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

उनके जन्मदिन पर आपका यह ब्लॉग शुरू होना अच्छा लगा ..इन्तजार रहेगा आपकी अगली पोस्ट का .यह भी एक एक अजब सा एहसास होता है अमृता के घर जा कर ..जिस में वो न होते हुए भी लगातार वहां अपनी मोजूदगी का एहसास बनाए रखती है .इमरोज के लफ्जों में .उनकी आँखों से छलकते प्यार में ...

सुशील कुमार छौक्कर said...

सबसे पहले एक बात कहूँगा कि एक ओर इंसान मिला मुझे अमृता जी को चाहने वाला। आपकी शुरुवात अच्छी हैं। वो भी अमृता जी के जन्मदिन पर। इससे अच्छी बात भला क्या होगी। और आपने लिखा भी सुन्दर है। अमृता जी के बारे क्या कहूँ जितना कहा जाए उतना कम है। मुझे आपकी अगली पोस्ट का इंतजार रहेगा।

amar said...

जन्म-दिन अम्रता प्रीतम का पर उपहार आपने दिया हम जैसों को जो उनकी रचनाएं जैसे घुट्टी में पीकर पले हैं। हार्दिक आभार और बधाई।

रोशन प्रेमयोगी said...

naya blog shuru karane ki badhai
-roshan premyogi

parul said...

app bahut acha likhti hein aur apke lekh mein kafi bhawnaye hoti h
mam u r good writer

ρяєєтι said...

हम सिर्फ अमृता प्रीतम को जानते थे. स्कूल में उन्हें ही पढ़ा था न् . २ दिन पहले "माँ" ने हमें इमरोज़ जी से परिचय करवाया, ofcourse उनकी बातो से ... हमें अमृता-इमरोज़ के बारे में जानने की और जिज्ञाशा हुई और इसी जिग्याशावश हम खोजते खोजते आपके ब्लॉग तक पहुच गए, और आपके द्वारा भी इन्हें कुछ ओर जाना ., बहूत शुक्रिया ...
बधाई आपके ब्लॉग और इस् पोस्ट के लिए ...!